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प्राचीन भारतीय इतिहास : संक्षिप्त परिचय

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प्राचीन भारतीय इतिहास

पुरापाषाण काल

होमो सेपियन्स पहली बार इस चरण के अंत में दिखाई दिए  । पुरापाषाण काल के पुरुषों ने औजारों का इस्तेमाल करना सीखा जो चूने के पत्थर से बने होते थे । परिवारों का अस्तित्व नहीं था । इस कालावधि में कृषि और आग का उपयोग नहीं किया गया था । इस अवधि में खाने के लिए शुतुरमुर्ग के अंडे का उपयोग किया गया था । भारत में महत्वपूर्ण पुरापाषाण स्थल भीमबेटका (मध्यप्रदेश), हुन्सगी, कुर्नूल गुफाएं, नर्मदा घाटी (हथनोरा, मध्यप्रदेश) और कलादी बेसिन हैं ।

मध्यपाषाण काल

इस अवधि में प्रमुख जलवायु परिवर्तन हुए, जिससे मानव को नए क्षेत्रों में स्थानांतरित होने के लिए मजबूर कर दिया । इस अवधि में पशुओं और मवेशियों के पालन का आरंभ हुआ । अस्थायी विवाह देखे गए । लोगों ने गुफा चित्र बनाना शुरू कर दिया और जानवरों की आकृति वाले मानव चित्रों को पेंटिंग के रूप में उकेरा गया । इस अवधि के लोगों ने मृत्यु के बाद जीवन में विश्वास जताया और उन्होंने शवों को दफनाना शुरू कर दिया । भारत में इस काल के महत्वपूर्ण स्थल ब्रह्मगिरी (मैसूर), नर्मदा, विंद्या, गुजरात आदि हैं ।

नवपाषाण काल

भारत में नवपाषाण काल 7000 ईसा पूर्व में शुरू हुआ । इस अवधि में पहिये की खोज की गई थी, जिसका उपयोग परिवहन के लिए किया गया था और इस अवधि में मिट्टी के बर्तन बनाने का काम भी शुरू हुआ था । इस अवधि में स्थायी विवाह होने लगे और खेती करने शुरूआत हुई । लोग अधिक बुद्धिमान हो गए और उन्होंने कृषि के नए तरीके शुरू किये । भारत में महत्वपूर्ण नवपाषाण स्थल बुर्जहोम (कश्मीर), गुफक्राल (कश्मीर), चिरांद (बिहार), दोजाली हैडिंग (त्रिपुरा / असम), कोल्डिहवा (यूपी),  महागरा (यूपी) हैं ।

ताम्रपाषण काल

नवपाषाण काल के अंत के साथ ताम्रपाषण काल में नए प्रकार के औजारों का उपयोग किया गया था जो धातु से बने थे और तांबा पहली धातु थी जिसका उपयोग किया गया था । पत्थर और तांबे के उपयोग के आधार पर एक संस्कृति का आगमन हुआ और इसे ताम्रपाषण काल कहा गया जिसका अर्थ पत्थर-तांबे की अवधि है । "कांस्य युग" इसी चरण में शुरू हुआ था । इस अवधि में ही सिंधु घाटी सभ्यता का विकास हुआ ।

लौहयुग

लौह युग की शुरुआत के साथ ही लोगों ने लोहे के बने औजारों का उपयोग करना सीख लिया और बड़ी आसानी से औजारों का उपयोग करना शुरू कर दिया । इस अवधि में लगभग 1000 वर्षों तक वैदिक काल माना गया । भारत का लौह युग वैदिक काल से प्रभावित होकर नए युग के रूप में उभरा । वैदिक काल में हड़प्पा सभ्यता के पतन के बाद कांस्य युग की समाप्ति दोनों शामिल हैं । सिंधु नदी घाटी की हड़प्पा सभ्यता जटिल और अत्यधिक शहरीकृत हो चुकी थी । वैदिक काल के समाज छोटे थे, ज्यादातर केवल एक गांव के रूप में सिमटे हुए थे । क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में बदलाव के साथ-साथ सूखा पड़ना, भारत के कांस्य-युग की स्थिरता को ध्वस्त करने वाले संभावित कारण थे । इसके बाद आर्य भारत आए । जैन धर्म और बौद्ध धर्म, महाजनपद - सिंधु घाटी के बाद की प्रमुख सभ्यता- गंगा नदी के तट पर, मगध साम्राज्य - हरंका कुल का बिम्बिसार, सिसुंगा वंश - कलसोका (काकावीन), नंद साम्राज्य - महापद्म-नंद, धना-नंद फ़ारसी-ग्रीक: अलेक्जेंडर आदि लौह युग में घटित हुई कुछ घटनाएँ हैं ।

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